हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे , क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही ..।
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मुकाम वो चाहिए की जिस दिन भी हारु , उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेंरे चर्चे हो!!!!
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इतना भी गुमान न कर आपनी जीत पर ऐ बेखबर, शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं..!!
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हिम्मत को परखने की गुस्ताखी न करना, पहले भी कई तूफानों का रुख मोड़ चुका हूँ....!!!!
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लोगो के # ब्लड गुप मे(+) ओर (-) आता हे, ओर # हमारे ब्लड गुप मे # Attitude आता है !!!!
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बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं.. अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती. !!!!
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मेरा वजूद नहीं किसी तलवार और तख़्त ओ ताज का मोहताज, में अपने हुनर और होंठो की हंसी से लोगो के दिल पे राज करता हैं!!!!
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मिल सके आसानी से , उसकी ख्वाहिश किसे है? ज़िद तो उसकी है .. जो मुकद्दर में लिखा ही नहीं!!!!!
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