मरने के नाम से जो रखते थे होठों पे उंगलियां, अफसोस वही लोग मेरे दिल के कातिल निकले|
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उन घरों में जहाँ मिट्टी के घड़े रहते हैं, क़द में छोटे हों मगर लोग बड़े रहते हैं|
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नखरे तो सिर्फ मम्मी पापा उठाते हैं .. दुनिया वाले तो बस ऊँगली उठाते है
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जिसे डर ही नहीं था, मुझे खोने का...
वो क्या" अफसोस करता होगा..! मेरे ना होने का..!
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हम भी शरीफों की गिनती में आते है,अगर कोई ऊँगली ना करे
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*ठंड क्या है....

क्या है ठंड ?

हमारे आत्मबल से ठंड का बल ज्यादा है..... ये सोचना है ठंड !

ठंड से भयभीत होकर.... बिस्तर में सोते रहना है ठंड !

जिस नीच ने मेरे शरीर को सुस्त किया......
उससे डरकर, हाथ पैर धोकर, बिना नहाये, बाथरूम से पीठ दिखाकर भागना है ठंड!


उस ठंड को मारने जा रहा हूँ मैं !....

उसकी छाती चीरकर.... साबुन से नहाने जा रहा हूँ मैं...

जय~~~ माहिष्मती~~~ !!!

बाहुबली 3
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दिल ने कहा कि दोस्तों को message करूं ।

Mobile उठाया,
फिर सोचा रहने दो, दिल तो पागल है।

फिर दुबारा सोचा दिल पागल है तो क्या हुआ,
दोस्त कौन से normal हैं।!!!

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दुश्मन बने दुनिया तो बस इतना याद रख मेरे दोस्त की
तेरा यार जिन्दा तो तेरा हथियार जिन्दा है
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